नई दिल्ली

देश में पहली बार ऐसी स्थिति देखी गई जब सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया. सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमने चीफ जस्टिस  (सीजेआई) से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. इन आरोपों को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की आज सुप्रीम कोर्ट के जजों से बातचीत होनी थी, लेकिन आरोप लगाने वाले चार जजों में से तीन जज शहर से बाहर हैं.

इस संबंध में बार एसोसिएशन ने आज शाम चार बजे बैठक बुलाई है. वहीं अटॉर्नी जनरल ने उम्मीद जताई है कि आज विवाद सुलझ सकता है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि देशवासियों में भ्रम पैदा करना जुडिशियरी के लिए ठीक नहीं है.

CJI से मिले बगैर वापस लौटे पीएम के सचिव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को शनिवार सुबह CJI आवास के बाहर उनकी कार में देखा. बताया जा रहा है कि प्रधान सचिव का एक सहायक CJI के कैंप ऑफिस गया और मिनटों में ही वापस आ गया, इसके बाद नृपेंद्र मिश्रा की कार वहां से रवाना हो गई.

सूत्रों के जरिए जस्टिस चेल्मेश्वर के दफ्तर से जानकारी मिली है कि वे आज चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से नहीं मिलेंगे. बता दें कि चार जजों में से तीन जज शहर से बाहर हैं. जस्टिस रंजन गोगोई लेक्चर के लिए कोलकाता गए हुए हैं. ऐसे में चीफ जस्टिस से आज की मुलाकात को रद्द बताया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा बगावती तेवर अपनाए जाने और के बाद चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा, सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सब जज बराबर हैं और स्वतंत्र माने जाते हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सभी केसों का सही बंटवारा होता है. बता दें कि सवाल उठाने वाले सुप्रीम के चार जज, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने इन्हीं दो बातों को प्रमुख रूप से अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था.

आपको बता दें कि शुक्रवार सुबह देश में पहली बार न्यायपालिका में असाधारण स्थिति देखी गई. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है. सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.

चारों जजों ने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा. हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की. उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जो कि प्रशासन के बारे में थे, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे. चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं. जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए. यह पहली बार है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की हो. वहीं इस मामले में अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने कहा कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच सारी तकरार खत्म हो जाएगी और सारे मामले सुलझा लिए जाएंगे.

Source : Agency