राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के दूर दराज गांवों में रहने वाले बच्चे भी शासन की योजनाओं से जुड़कर अब अपनी प्रतिभा निखार सकेंगे. दरअसल, भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस ने राजनांदगांव जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत 59 बच्चों का चयन किया है जो सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी ‘सीपेट’ में प्रशिक्षण प्राप्त कर न सिर्फ योग्य बनेंगे बल्कि अपना जीवन स्तर भी सुधार सकेंगे.

इस बारे में जानकारी देते हुए आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक अशोक कुमार नेगी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान के तहत आईटीबीपी द्वारा जिला राजनांदागांव के सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों से चयनीत किए गए बच्चों को बीते शुक्रवार को रायपुर रवाना किया गया है. उन्होंने कहा कि ये बच्चे अब रायपुर स्थित रसायन एवं खाद मंत्रालय भारत सरकार के उपक्रम 'सीपेट' में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे.

वहीं आईटीबीपी के भिलाई स्थित मुख्य कार्यालय पहुंचे बच्चों ने भी इस दौरान आपने जीवन से जुड़ी बातों को साझा किया, जहां डीआईजी अशोक कुमार नेगी ने इनसे परिचय प्राप्त कर इनकी हौसला अफजाई की. यह ऐसा पहला मौका था जब ये छात्र नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलकर शहर देखने पहुंचे. अब अपने परिवार से दूर रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए रायपुर रवाना हो गए हैं. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह का तहे दिल से धन्यवाद किया है.

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस द्वारा बीते 10 माह के अंदर प्रदेश के करीब 1 हजार से भी ज्यादा बच्चों का काउंसिलिंग कर उन्हें सीपेट में प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया है. इनमें से 334 बालक बालिकाओं ने अपना प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है और अब भारत के कई नामचीन पुणे, बैंगलोर और नोएडा जैसे शहरों की प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

निःसंदेह शासन की यह योजना इन वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे जुड़कर न सिर्फ ये अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं बल्कि अपना उज्जवल भविष्य भी गढ़ रहे हैं.

Source : Agency