ग्वालियर
सातवें वेतनमान की मांग को लेकर नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ-साथ डॉक्टरों के भी सर्मथन में आने से हड़कंप मच गया है। प्रदेश भर के अस्पतालों में बेमियादी हड़ताल के ऐलान से घबराई सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन से पूछा है कि सातवां वेतनमान देने पर कितना वित्तीय भार पड़ेगा?  चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा पूछे गए इस सवाल पर नर्सेस एसोसिएशन ने आपत्ती जताते हुए कहा है कि प्रदेश के मंत्रियों का वेतन कई गुना बढा दिया गया। सरकार ने तब वित्तीय भार की चिंता नहीं की, लेकिन हमारे हक का वेतनमान बढ़ाने पर सरकार को वित्तीय भार की चिंता हो रहीं है। नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सको का संयुक्त मोर्चा मेडिकल टीचर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने साफ कर दिया है कि इस बार सरकार से आश्वासन नहीं बल्कि सातवें वेतनमान का आदेश चाहिए।

ये है मामला
सातवें वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग नर्सेस एसोसिएशन लम्बे समय से की जा रही है। सरकार हमेशा इस मामले मे आश्वासन ही देती आई है। वहीं सांतवा वेतनमान नहीं मिलने और भर्ती नियमों में हुए बदलाव से डॉक्टर भी नाराज थे। लिहाजा 9 जनवरी को जयारोग्य अस्पताल में नर्सेस और पैरामेडिकल स्टाफ ने सामूहिक अवकाश कर धरना दिया। डॉक्टरों ने भी धरना स्थल पहुंचकर अपना सर्मथन दे दिया। इसके बाद फौरन संयुक्त मोर्चा मेडिकल टीचर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन का गठन किया गया।

Source : Agency