इटावा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एनेक्सी तथा हज कमेटी कार्यालय के बाहरी दीवार के भगवा रंग से पुत जाने का मामला थमा नहीं था कि इटावा में शौचालयों के इसी रंग में कर दिये जाने को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गयी है। 

इटावा के गांव में शौचालयों की पुताई भगवा रंग से की गयी है। इस रंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राम प्रधान साफ तौर पर बताते हैं कि उन्होंने अपनी पसन्द से इस रंग का प्रयोग किया है। उनका कहना है कि भगवा रंग उनकी पसन्द का है। रंग मुख्यमंत्री की पसंद से ही मेल खाता है, इसीलिए उन्होंने अपने गांव में स्थापित कराए गए सभी शौचालयों को भगवा रंग से पुतवा दिया है। 

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि अब तो शौचालयों को भी भगवा रंग में रंगवाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने सवाल किया कि क्या इससे भगवान का अपमान नहीं हो रहा है। भगवा तो धार्मिक रंग माना जाता है। शौचालयों का रंग तो भगवा नहीं ही होना चाहिए। इटावा समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव का गृह जिला है। 

उधर, इटावा के अमृतपुर गांव के प्रधान वेदपाल सिंह नायक ने शौचालयों को भगवा रंग में करने का पक्ष लेते हुये कहा कि रंगो पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसमें अगर किसी प्रकार की कोई राजनीति कर रहा है तो यह गलत है। यह रंग थोड़ा अलग है। यह अन्य रंगों से अलग हटकर दिखता है। इससे लोग प्रेरित भी होते हैं और शौचालय की उपयोगिता भी समझते हैं। प्रदेश सरकार की पसन्द भी भगवा है तो फिर क्यों न ग्राम पंचायतों में शौचालय का रंग भी भगवा हो। 

उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर सभी लोगों से पूछकर और सहमति के बाद शौचालयों को भगवा रंग में रंगा गया है। यदि सफेद रंग शौचालय का होता तो उसके गंदा होने की संभावना ज्यादा रहती। इस रंग में ऐसा नहीं है। गांव के ही अशोक ने कहा कि जब केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार है तो फिर क्यों न उसी रंग में रंगा जाये। इस गांव में 350 के आसपास शौचालय बन चुके हैं और इनमें से डेढ़ सौ को भगवा रंग से रंगा जा चुका है। इसी गांव का दिवाकर बताता है कि मुख्यमंत्री को भगवा रंग पसंद है और हमें भी यह रंग पसंद है। मुख्यमंत्री की पसंद के चलते गांव के प्रधान ने भी शौचालय का रंग भी भगवा करवा दिया। उन्होंने बताया कि गॉंव के लोग अपने घरों को भी रंगने के तैयारी कर रहे हैं। 

Source : Agency