नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर तैयारी शुरू हो गई है. पीएम मोदी ने भारतीय जनता पार्टी और अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराए जाने की योजना पर देशभर में लोगों को जागरुक कराएं.

नीति आयोग के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े लोगों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक दलों पर देश में एक चुनाव की योजना पर समर्थन के लिए दबाव बनाएं. आजादी के बाद देश में इसे राजनीतिक स्तर पर सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है.

आरएसएस शुरू कराएगा चर्चा

आरएसएस से संबंधित संगठन रामभाऊ मागली प्रभोदनी ग्रुप इस मुद्दे पर बहस के लिए इस महीने दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन करने जा रहा है. भाजपा के उपाध्यक्ष डॉक्टर विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, "पार्टी देश में एक साथ एक चुनाव कराए जाने को लेकर बेहद गंभीर है और लोगों में इसके प्रति जागरुकता लाने और व्यवहारिक तौर पर इसे अंजाम देने में होने वाली मुश्किलों पर बहस करेगी."

उन्होंने कहा, "सभी पार्टियों के नेता देश में एक चुनाव के विचार पर अपनी सहमति जता चुके हैं. सभी चुनावों के लिए एक आम वोटर लिस्ट बनाने की योजना भी है."

सेमिनार में निति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, बीजू जनता दल के बैजंत जय पांडा, जनता दल (यू) के केसी त्यागी और कांग्रेस के गुरुदास कामत के अलावा कई अन्य नेता भी हिस्सा लेंगे.


5 मुद्दों पर होगी बहस

फोरम में 5 मुख्य मुद्दों चुनाव की विविधता पर आने वाली दिक्कतों, एक साथ चुनाव के विचार और इसके अनुपालन पर होने वाली समस्याओं, अविश्वास और सदन के भंग होने की स्थिति, आम चुनाव के साथ स्थानीय चुनाव कराने का विचार तथा कई देशों में एक साथ चुनाव कराए जाने से जुड़े अनुभव पर बहस किया जाएगा.

फिक्स तारीख पर होते हैं स्वीडन में सभी चुनाव

दूसरी ओर, संसदीय समिति अन्य देशों में एक साथ चुनाव कराए जाने के अनुभव को लेकर अपने यहां एक साथ चुनाव की योजना पर काम कर रही है. हालांकि इसके लिए उसे अभी लंबा सफर तय किया जाना है. समिति ने दक्षिण अफ्रीका की चुनावी प्रक्रिया पर अध्ययन किया है क्योंकि वहां पर हर 5 साल में आम और प्रांतीय विधानसभा चुनाव होते हैं और इसके 2 साल बाद स्थानीय निकाय के चुनाव कराए जाते हैं.

स्वीडन में हर चौथे साल सितंबर में दूसरे रविवार के दिन राष्ट्रीय, प्रांतीय, काउंटी समिति और स्थानीय निकाय के चुनाव कराए जाते हैं. हालांकि भारत में सभी दलों ने एक चुनाव की योजना पर सहमति जताई है, लेकिन इन्हें व्यवहारिक तौर पर अमल में लाने पर संशय जताया जा रहा है. कांग्रेस इसे असंभव और अव्यवहारिक बता रही है.

सहस्रबुद्धे ने कहा कि भाजपा और सरकार इस पर विचार कर रही है कि सदन में विश्वास खोने के बाद विपक्षी पार्टी को नई सरकार बनाने के लिए मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "समय के पहले सदन के भंग होने की संभावना को खत्म किए जाने की योजाना है. अगर किसी कारणवश कोई सीट खाली हो जाती है और वहां उप चुनाव की स्थिति में दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जा सकता है. चुनाव आयोग भी कुछ इसी तरह का विचार पहले ही रख चुका है."

Source : Agency