नई दिल्ली 
गुजरात में 150 प्लस का टारगेट रखने के बावजूद जीती गई सीटों का आंकड़ा 100 से भी कम रहने के बाद अब बीजेपी कर्नाटक में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। यही वजह है कि इस बार पार्टी ने राज्य में गुजरात की तरह भारी भरकम जीत का टारगेट रखने की बजाय 224 में से 150 सीटों की जीत का टारगेट रखा है। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर किसी तरह का भ्रम न रहे इसलिए इस बार पार्टी बी.एस. येदियुरप्पा को विधानसभा का भी चुनाव लड़ाएगी।

सूत्रों का कहना है कि गुजरात में पार्टी ने 182 में से 150 सीटों की जीत का टारगेट रखा था, लेकिन इस बार पार्टी टारगेट के आसपास पहुंचना तो दूर 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। जिसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी को चुनाव परिणामों के बाद आलोचना का सामना करना पड़ा। खुद पार्टी में यह सवाल उठाया गया कि आखिर इतना बड़ा टारगेट रखने की जरूरत ही क्या थी? खुद बीजेपी नेताओं को इस पर सफाई देनी पड़ी। 

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी ने कर्नाटक में 224 में से ही 150 का टारगेट रखा है। इसकी वजह यह है कि पार्टी को लग रहा है कि इस बार बिना वजह का ऐसा टारगेट न रखा जाए, जिसे हासिल करना ही मुश्किल हो। सूत्रों का कहना है कि इस बार बीजेपी हिमाचल प्रदेश और गुजरात के नतीजों से सबक सीखा है। इसके तहत ही पार्टी अब कर्नाटक में अतिआत्मविश्वास दिखाने की कोशिश करने से बचना चाहती है। इसकी वजह यह भी है कि उसे लग रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस की हालत ऐसी नहीं है कि उसे बिलकुल हारा हुआ मान लिया जाए। हालांकि, पार्टी का आकलन यह है कि राज्य में कांग्रेस सरकार के खिलाफ नाराजगी है। 

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बीजेपी मुख्यमंत्री पद को लेकर भ्रम नहीं रखना चाहती। पहले ही बी.एस. येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाने की बात हो चुकी है। अब पार्टी मौजूदा सांसद येदियुरप्पा को विधानसभा का भी चुनाव लड़ाएगी ताकि मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह की अटकलबाजी की कोई गुंजाइश ही न रहे। कर्नाटक में भी येदियुरप्पा के अलावा ईश्वरप्पा गुट भी है, जिसे फिलहाल पार्टी ने शांत करा दिया है लेकिन ऐन मौके पर किसी तरह का कोई विवाद न हो इसलिए पार्टी उम्मीदवारों काे लेकर भी पहले ही अपनी स्टडी करा रही है ताकि चुनाव से पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। 

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