पटना 
बहुचर्चित चारा घोटाला के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल जेल की सजा मिलने के बाद और उनकी गैरमौजूदगी में आरजेडी की बागडोर उनके पुत्र और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव संभालेंगे। कहा जा रहा है कि सजा के दौरान भी लालू आरजेडी के अध्यक्ष बने रहेंगे और उनकी गैर मौजूदगी में तेजस्वी पार्टी की सभी गतिविधियों का संचालन करेंगे।

शनिवार को आरजेडी की एक अहम बैठक के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी के सिंहासन पर लालू की 'खड़ाऊं' रख, तेजस्वी अब पार्टी की नैया पार कराने का प्रयास करेंगे। अगर ऐसा होता है तो तेजस्वी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंदरखाने में उपजी कलह को समाप्त करना होगा। 

राबड़ी को भी दी चुकी है पार्टी की कमान 
यह पहली बार नहीं है जब कि लालू की गैरमौजूदगी में आरजेडी की कमान किसी अन्य को सौंपी जा रही हो। इससे पहले लालू के जेल जाने पर आरजेडी की कमान उनकी पत्नी और पूर्व सीएम राबड़ी देवी को सौंपी गई थी। इस दौरान राबड़ी ने संकट की स्थिति में पार्टी को बखूबी संभाल रखा था। वैसे इस बार परिस्थिति भिन्न है। 

'लालू की चिट्ठी लेकर जनता के बीच जाएंगे' 
शनिवार को पटना में हुई बैठक के बाद तेजस्वी ने भी पार्टी को एकजुट बताते हुए कहा, 'लालू जी एक व्यक्ति नहीं विचारधारा हैं। लालू प्रसाद यादव ने जनता के नाम एक खत लिखा है, उसे जन-जन तक पहुंचाना है। मकर संक्रांति के बाद आरजेडी के नेता और कार्यकर्ता लालू जी के संदेश और उनकी चिट्ठी को लेकर जन-जन के बीच जाएंगे।' 

राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि अगर तेजस्वी को आरजेडी की कमान सौंपी जाती है तो उन्हें न सिर्फ पार्टी के आंतरिक हालातों से निपटने के प्रयास करने होंगे, बल्कि बिहार में पार्टी के परंपरागत वोट को भी साथ बनाए रखने की कोशिश करनी होगी। 

Source : Agency