संयम से बड़े से बड़ा कार्य भी संभव हो जाता है इसीलिए महाभारत जैसा महाकाव्‍य श्री गणेश से लिखवाया गया। बुधवार, लम्‍बोदर और बुद्धि प्रदाता जैसे नामों से प्रसिद्ध श्री गणेश की पूजा का दिन माना जाता है। वे अत्‍यंत बुद्धिमान, प्रथम पूज्‍य और विनम्र हैं इन सारी विशेषताओं के बारे में तो आप जानते ही हैं। आज हम उनकी एक और विशेषता का वर्णन यहां कर रहे हैं। ये गुण है संयम, इस बारे में एक कथा भी प्रसिद्ध है। आइये जानें क्‍या है वो कथा।  

व्‍यास जी किया जिक्र
सभी जानते हैं कि महाभारत लिखने के लिए व्यास जी को किसी व्यक्ति की तलाश हुई, तो इसके लिए उन्होंने गणेश जी को चुना। कार्य प्रारंभ हो गया। व्यास जी बोलते गए और गणेश जी लिखते गए। महाभारत पूरा हुआ, तो व्यास जी ने गणेश जी से कहा, 'मैंने चौबीस लाख शब्द बोलकर आपसे लिखवाए, लेकिन आश्चर्य है कि इसके बीच आप एक भी शब्द न बोले, चुपचाप लिखते रहे।' इस पर गणेश जी ने उत्तर दिया, 'बड़े काम संपन्न करने के लिए शक्ति चाहिए और शक्ति का आधार है संयम। संयम ही समस्त सिद्धियों का प्रदाता है। यदि मैंने वाणी का संयम न रखा होता, तो यह ग्रंथ कैसे तैयार होता?

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