महाभारत में विदुर ने कई नीतियों के बारे में बताया है। वे नीतियां न सिर्फ उस समय में उपयोगी थीं, बल्कि आज भी व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्व रखती हैं। अगर उन नीतियों का ध्यान रखा जाए, तो मनुष्य किसी भी परेशानी का हल आसानी से पा सकता है। विदुर ने ऐसी 6 चीजों के बारे में बताया है, जिन्हें मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा सुख माना गया है।

श्लोक-
आरोग्यामानृण्यमविप्रवासः सद्धिर्मनुष्यैः सह स्मप्रयोगः।
स्वप्रत्यया वृत्तिरभीतवासः षड् जीवनलोकस्य सुखानि राजन्।।

अर्थ- निरोग रहना (स्वस्थ रहना), ऋणि न होना (किसी से उधार न लेना), परदेश में (अपने देश से बाहर) न रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना (जीवन व्यापन के लिए किसी पर निर्भर न होना) और निडर होकर रहना- ये छः इस लोक के सुख है।

हमेशा स्वस्थ रहना
हमेशा स्वस्थ रहना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा वरदान होता है। जो मनुष्य हर समय बीमारियों की गिरफ्त में रहता है, उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमार मनुष्य कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता। ऐसे मनुष्य को अपनी शरीर के साथ-साथ धन का भी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए, कहा जाता है कि बीमारियों से बचे रहना सबसे बड़ा सुख होता है।

 किसी से उधार न लेना
मनुष्य को अपनी आय के अनुसार ही अपनी इच्छा रखनी चाहिए। कई लोगों का मन वश में नहीं होता। वे अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए दूसरों से उधार ले लेते हैं। दूसरों से पैसे उधार लेकर पाई गई सुविधाएं कभी सुख नहीं देती। कई बार लोग अपना लिया हुई कर्जा चुका नहीं पाते और अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी परेशानी में डाल देते हैं। जो मनुष्य हमेशा कर्ज से बचा रहता है, वह बहुत सुखी होता है।

अपने देश में रहना
कई कारणों से लोग अपना देश छोड़कर किसी और देश में रहने लगते हैं। ऐसा करने का कारण चाहे जो भी हो, लेकिन अपने देश में रहने का जो सुख है, वह कहीं और नहीं मिल सकता। जो मनुष्य अपना पूरा जीवन अपने लोग और अपने देश में बिताता है, वह बहुत सुखी होता है।

अच्छे लोगों की संगति होना
जो मनुष्य अच्छे और विद्वान लोगों से दोस्ती रखता है, उनके साथ अपना समय बिताता है, वह बहुत ही सुखी माना जाता है। बुरे लोगों की संगति का परिणाम भी बुरा ही होता है। जो मनुष्य दुष्ट और हिंसक लोगों के साथ मेल-मिलाप रखता है, उसे आगे चलकर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, जिसकी दोस्ती अच्छे लोगों के साथ होती है, वह बहुत सुखी होता है।

जीवन यापन के लिए किसी पर निर्भर न होना
जो मनुष्य अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने के लिए खुद धन कमाने में काबिल होता है, वह बहुत ही सुखी माना जाता है। कई लोग अपना जीवन चलाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, ऐसे लोगों का न तो स्वाभिमान होता है, न ही दूसरों की नजर में सम्मान। इसलिए, जो खुद मेहनत करके अपना जीवन चलाता हो, उसे सबसे सुखी माना जाता है।

निडर होकर जीना
जिसकी अपने से ज्यादा ताकतवर इंसान से दुश्मनी होती है, वह पूरा समय उसी दुश्मन के बारे में सोचता रहता है। ताकतवर दुश्मन उसे और उसके परिवार को किसी भी तरह की नुकसान पहुंचा सकता है या किसी बात को लेकर डर में जीने वाला मनुष्य कभी अपने जीवन का पूरा आनंद नहीं ले पाता। इसलिए, जो व्यक्ति बिना किसी भय के अपना जीवन जीता है, वह सबसे सुखी माना जाता है।

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