नई दिल्ली
भारत ने अभी तक औपचारिक तौर पर नेपाल की ओली-प्रचंड सरकार को शुभकामनाएं नहीं दी हैं। नेपाल में हुए चुनाव के बाद पड़ोसी देश में लेफ्ट की साझा सरकार बनी है। भारत की तरफ से अभी तक साधी गई चुप्पी जरूर विश्व परिदृश्य में कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं। इस बारे में जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने पूरे नतीजे आने तक इंतजार करने की बात कही।

रवीश कुमार ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि ओली के भारत के खिलाफ दिए बयानों की वजह से सरकार चुप्पी साधे हुए है। कुमार ने सिर्फ यही कहा, 'हम अभी तक निश्चित और आखिरी परिणामों का इंतजार कर रहे हैं।' रिपोर्ट के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) प्रणाली के तहत यूएमएल को 41 सीटें और फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के अंतर्गत 80 सीटें मिली हैं। प्रचंड की पार्टी को पीआर प्रणाली के तहत 17 और एफपीटीपी के तहत 36 सीटें मिली हैं। नेपाली कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही और 40 पीआर और 23 एफपीटीपी सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।

माओस्टि-यूएमएल पार्टी के पास बहुमत तो है, लेकिन संविधान में बदलाव के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं है। एक पत्रकार द्वारा जब नेपाल चुनावों पर विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया पूछी गई तो औपचारिक बयान जारी कर विदेश मंत्रालय की तरफ से नेपाल की नई सरकार के लिए बधाई संदेश जारी किया गया।

नेपाल में ओली सरकार की जीत भारत के लिए किसी न किसी रूप में खतरे का संकेत जरूरत है। ओली अपने चीन की तरफ खुले झुकाव के लिए जाने जाते हैं। भारत के साथ ओली सरकार की विदेश नीति के लिहाज से कहा जा सकता है कि ओली का सीधा झुकाव विरोधी चीन के ही प्रति है।

नेपाल में यह पहली सरकार है जो पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता मे आई है। नई सरकार से स्थिरता और विकास की उम्मीद की जा रही है। नेपाल के मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का भी मानना है कि फिलहाल सरकार में गठबंधन को लेकर थोड़ी उलझन जरूर है। माना जा रहा है कि आनेवाले कुछ दिनों में यह उलझन दूर होगी और नेपाल में एक स्थिर सरकार सत्ता संभालेगी।

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