कांकेर
बस्तर संभाग का कांकेर जिला नक्सल हिंसा से घोर प्रभावित क्षेत्र है. इसके अलावा ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में गरीबी व्याप्त है. पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां फसल भी आसानी से नहीं होती. ऐसे में किसानों ने एक नई तरकीब सोची. प्रशासन की मदद से यहां के किसान खासकर महिला किसानों ने सीताफल की खेती की. अब कांकेर में भारी मात्रा सीताफल की पैदावार हो रही है. इस फल से क्षेत्रीय लोगो की आय भी दोगुना होने लगी है.

कांकेर के किसान सीताफल यानि कस्टर्ड एप्पल उत्पादन कर इस स्थिति में पहुंच हैं कि अब साल के कुछ महीने तोड़ाई कर पैकेजिंग व् सफ्लाई कर भारी मुनाफा अर्जित कर लेते हैं. इस काम के लिए बड़ी संख्या में घरेलु महिलाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं. ये महिलाएं घर के काम के बाद सीताफल की तोड़ाई व पैकजिंग का काम करती हैं.

किसान राधा किसन व जयंती बाई बताती हैं कि जिले में सीताफल के तीन लाख से ज्यादा पेड़ हैं. इनसे प्रति वर्ष करीब 6 हजार मेट्रिक टन फल का उत्पादन होता है. कांकेर प्रशासन ने जिले के 3 ब्लाकों को अब इन सीताफल उत्पादन के लिए मास्टर प्रोजेक्ट में शामिल किया है. हर ब्लाक से 20 गांव शामिल किए गए हैं. यहां अब 47 महिला समूह तोड़ाई का काम कर रही हैं.

पहले किसान सीताफल को गांव से शहर लाकर 5 या 10 रुपए प्रति किलो के भाव में बेचते थे. इससे किसानों को कुछ खास लाभ नहीं होता था. यहां प्रशासन की मदद से इन महिला समूह को प्रशिक्षण दिया गया. इसका लाभ यह हुआ कि महिला समूहों द्वारा सीताफल के अन्य प्रोडक्ट बनाकर भी मार्केट में उतारा जा रहा है, जिससे खासा लाभ हो रहा है.

कांकेर के कृषि विभाग के उपसंचालक चिरंजीवी सरकार बताते हैं कि कांकेर की पहचान अब इन सीताफल से होने लगी है. नक्सलगढ़ में सीताफल उत्पादन करने में अंदुरनी इलाके के महिलाओं की ख़ासी रुचि दिखाई दे रहे है. इन सीताफल से अब यहां के वनवासियों का जीवन स्तर सुधरने लगा है.

Source : Agency