ग्वालियर 
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय भारत सरकार एवं राज्‍य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर पारित किए गए आदेशों का हवाला देते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी राहुल जैन ने शासकीय एवं प्राइवेट विद्यालयों के लिये गाइड लाइन सहित विस्तृत आदेश जारी किया हैं। सीबीएसई व आईसीएसई से संबद्ध जिले के समस्त विद्यालयों, राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग व माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्यप्रदेश से जुड़े समस्त शासकीय व प्राइवेट स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर जिला दंडाधिकारी द्वारा गत 29 सितंबर को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 133(1) जा.फो. के अंतर्गत प्रारंभिक आदेश जारी किया था। उसी आदेश को विधिवत सुनवाई के बाद अंतिम किया गया है। जिला दण्डाधिकारी जैन ने आदेश में स्पष्ट किया है कि घर से निकलने से लेकर स्कूल मार्ग, स्कूल में प्रवेश तथा वापस घर तक बच्चे के सकुशल पहुँचने की जवाबदेही विद्यालय प्रबंधन की होगी। उन्होंने सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में भी इन दिशा-निर्देशों का पूर्णत: पालन करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने सीबीएसई से संबद्ध समस्त विद्यालयों सहित सभी प्रकार के विद्यालयों में इस आदेश का दृढ़ता पूर्वक पालन करनें के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है आदेश का उल्लंघन भारतीय दंड विधान की धारा -188 के तहत दंडनीय होगा। उन्होंने निर्देश दिये कि जिला शिक्षा अधिकारी इस आदेश की कॉपी सर्वसंबंधित विद्यालयों में तामील कराकर उसका पालन सुनिश्चित करायें। जैन ने निर्देश दिये हैं कि आरटीओ, डीएसपी यातायात एवं जिला शिक्षा अधिकारी आदेश का दृढ़तापूर्वक पालन कराकर मासिक रूप से समीक्षा करें। साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाए। इस आदेश का शिथिलीकरण अपरिहार्य स्थिति में पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं होगा। डीएम ने आदेश में साफ किया है कि अशासकीय विद्यालयों को अपने समस्त शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक स्टाफ से इस आशय का शपथ पत्र अनिवार्यत: लेना होगा कि उनके विरूद्ध लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत कोई भी मामला दर्ज नहीं है। साथ ही बस ड्रायवर, चौकीदार, माली इत्यादि सहित समस्त प्रकार के स्टाफ का चरित्र सत्यापन भी अनिवार्यत: कराना होगा। मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों को सरकार द्वारा वाहनों के संबंध में निर्धारित सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। साथ ही मान्यता के लिये आवेदन करते समय पंजीकृत वाहनों की सूची संलग्न करनी होगी। 

यह भी निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय प्रवेश एवं निकास द्वार के साथ-साथ ऐसे सभी स्थानों पर सीसीटीव्ही कैमरे लगाए जाएँ, जहाँ से आगुंतकों के क्रियाकलापों पर नजर रखी जा सके। सीसीटीव्ही कैमरे के रिकॉर्डिंग भी निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखनी होगी। विद्यालयों की वाउण्ड्रीवॉल मजबूत हो तथा उसमें यथा संभव तीन या चार गेट हों और बाउण्ड्रीवॉल के ऊपर तार फैंसिंग या कांच के टुकड़े लगाए जाएँ। विद्यालय के प्रवेश द्वार पर एक टेलीफोन अथवा मोबाइल फोन की व्यवस्था रहे, जिससे जरूरत पड़ने पर तत्काल सूचना का आदान-प्रदान किया जा सके। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम और अलार्म सिस्टम भी लगाना होगा। स्कूल के बाथरूम व शौचालयों में खिड़कियाँ व दरवाजे लगे हों और साफ-सफाई की उत्तम व्यवस्था होना चाहिए। साथ ही स्वच्छ पेयजल, फायर सेफ्टी, यातायात आदि के संबंध में नगर निगम, विद्युत व परिवहन विभाग से प्रमाण-पत्र लेने होंगे। 

डीएम व पुलिस के नम्बर प्रदर्शित करें
जिला दण्डाधिकारी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में जिला दण्डाधिकारी, नजदीकी पुलिस थाना, पुलिस कंट्रोल रूम व पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के टेलीफोन व मोबाइल नम्बर प्रदर्शित करें। साथ ही यह नम्बर शैक्षणिक स्टाफ व सुरक्षा गार्डों को भी उपलब्ध करायें। 

शिकायत पेटी रखें
हर विद्यालय में एक शिकायत पेटी रखी जाए। जिसमें अभिभावक अथवा विद्यार्थी अपनी शिकायतें डाल सकें। शाला प्राचार्य नियमित रूप से इस शिकायत पेटी को खोलकर संबंधित की समस्या का समाधान करें। 

बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन की सूचना का आदान-प्रदान हो
यदि किसी बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन दिखाई दे। मसलन उसका पढ़ाई-लिखाई में मन न लगे, गुम-सुम रहे और खेलना बंद कर दे तो ऐसी स्थिति में पालक व शिक्षक परस्पर चर्चा करें। साथ ही विद्यालय के काउन्सलर से उसकी काउन्सलिंग कराएँ। 

स्कूल बसों के संबंध में निर्देश

  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में स्कूल बस पीले रंग की हो, जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम व फोन नम्बर होना चाहिए।
  • विद्यालय का स्वयं का वाहन होने पर “स्कूल बस” और किराए के वाहन पर आगे और पीछे “ऑन स्कूल ड्यूटी” प्रदर्शित हो।
  • आरटीओ से फिटनेस सर्टिफिकेट का अद्यतन होता रहे। साथ ही बस पर कम से कम दो वाहन चालक हों और उनका फिटनेस व चरित्र सत्यापन नियमित रूप से कराया जाए। वाहन चालक पर पाँच साल तक भारी वाहन चलाने का अनुभव हो।
  • वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे न बैठें। स्कूल बस में महिला कंडक्टर की उपलब्धता अनिवार्य है। यदि ऐसा संभव न हो तो महिला शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाए।
  • ड्रायवर व कंडक्टर के मोबाइल नम्बर शिक्षक, विद्यार्थी व अभिभावकों पर रहें।
  • स्कूल बस में हॉरिजेंटल ग्रिल लगी हो, वाहनों के दरवाजे अंदर से बंद करने की व्यवस्था हो। साथ ही बसों में सीटों के नीचे बैग रखने का इंतजाम हो।
  • ड्रायवरों को इस आशय में लिखित में देना होगा कि छात्र-छात्राओं के परिवहन की स्थिति में गति सीमा 40 कि.मी. प्रतिघंटा से अधिक नहीं होगी।
     
Source : Agency